पंजाब अनुसूचित जाति आयोग ने राष्ट्रीय आयोग से की अपमानजनक शब्द हटाने की मांग पंजाब आयोग के अध्यक्ष जसवीर सिंह गढ़ी राष्ट्रीय आयोग के अध्यक्ष से मिले
चंडीगढ़, 19 मई (हरिंदर सिंह)पंजाब राज्य अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष जसवीर सिंह गढ़ी ने आगामी ‘जनगणना 2027’ की सूचियों और डिजिटल प्लेटफॉर्म से अनुसूचित जातियों से जुड़ी अपमानजनक और असामाजिक शब्दावली को तुरंत हटाने के लिए राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (नई दिल्ली) को एक आधिकारिक ज्ञापन भेजा है।आयोग के समक्ष दायर एक शिकायत (संख्या 1211/26/पी एस एस सी सी/5325-26) का संज्ञान लेते हुए अध्यक्ष जसवीर सिंह गढ़ी ने स्पष्ट किया कि वर्तमान सूचियों में शामिल कुछ पुराने शब्द चुके वाल्मीकि वह मजबूरी सिख जातियां के लिए प्रयोग में लगाए गए हैं (जैसे “चू…”और”भंगी”), वर्तमान समाज में अत्यधिक अपमानजनक और गरिमा को ठेस पहुँचाने वाले हैं। सरकारी दस्तावेजों में इनका लगातार इस्तेमाल सीधे तौर पर भारत के संविधान के आर्टिकल 14 (समानता), आर्टिकल 17 (अस्पृश्यता उन्मूलन) और आर्टिकल 21 (गरिमा से जीने का अधिकार) लिए का उल्लंघन है। पंजाब राज्य अनुसूचित जातियां आयोग की अध्यक्ष जसवीर सिंह गढ़ी द्वारा की गई मुख्य मांगें की है 1. शब्दावली में सुधार: जनगणना के फॉर्मैट और स्व-गणना पोर्टल से सभी आपत्तिजनक शब्दों को तुरंत हटाया जाए। 2.कानूनी संशोधन: इन शब्दों को हमेशा के लिए विलोपित करने के लिए केंद्र सरकार ‘संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश’ में आवश्यक विधायी बदलाव करे।3.हितधारकों से परामर्श: भविष्य में ऐसे वर्गीकरण तय करने से पहले राष्ट्रीय व राज्य आयोगों और संबंधित समुदायों के प्रतिनिधियों से सलाह ली जाए।चेयरमैन जस्वीर सिंह गढ़ी ने ज़ोर देकर कहा कि यह मामला प्रशासनिक प्रक्रियाओं से ऊपर उठकर संवैधानिक नैतिकता और सामाजिक न्याय से जुड़ा है, जिसके लिए भारत सरकार द्वारा तुरंत सुधारात्मक नीतिगत कदम उठाए जाने की आवश्यकता है। इन आपत्तिजनक शब्दों को उठाएं जाने के लिए राष्ट्रीय सरकार के हर प्लेटफार्म पर पंजाब राज्य अनुसूचित जाति कमीशन की ओर से मेमोरेंडम दिया जाएगा. अगर केंद्र सरकार ने ईश्वर ध्यान ना दिया तो आने वाले समय में देश के राष्ट्रपति से भी मुलाकात की जाएगी.

